वैसे तो मैं ताजमहल को एक कलाकृति के रूप में ही देखता हूं पर कहां जाता है की शहंशाह ने जिसे अपनी बेगम के प्यार में बनवाया था तो फिर ध्यान से देखने पर ताजमहल के चमकते हुए सफेद संगमरमर के पत्थरों पर बिखरा हुआ गुलाबी रंग देख कर लगता है कि कहीं यह मुमताज के Galo की लालिमा तो नहीं है तभी इतने में एक धीमी सी आवाज आती है और मुझे झकझोर कर रख देती है और सिसकती हुए कहती है कि यह मुमताज के गालों की लालिमा का रंग नहीं यह हम हजारों बेगुनाहों मजदूरों के कटे हुए हाथों से बहते हुए खून का रंग है जो मुझे फिर से सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या यह सच में प्यार की निशानी है ? हजारों बेगुनाहों मजदूरों जिन्होंने जी जान से अपनी कला का प्रदर्शन किया उनके खून से लथपथ यह इमारत प्यार की निशानी बन सकती हैं फिर यही जानने के लिए बहुत सारे महान लोगों से बहुत सारी महान किताबों से प्यार की परिभाषा जानने की कोशिश की लेकिन कहीं भी यह नहीं मिला कि प्यार का मतलब होता है बेगुनाहों के खून से अपने प्रेम की इबादत लिखना जैसा शहंशाह नेें किया था और फिर बहुत सारे अनसुलझे सवालो के बीच मन घोर निराशा में डूबकर शांत हो जाता है और यह सवाल सवाल ही बने रह जाते हैं अगर आपको कहीं इसका जवाब मिले मुझे भी बताना or kya aap bhi Kahna ChahoGe hats off , Amazing, symbol of love and so on
अनुराग
Thursday, 17 December 2015
Tajmahal
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